जेठ के दुपहरिया में
खटत बा ……….
……… एह उमेद पर
कि एक दिन सावन आई
त मन के धरती हरियरा जाई ।
बाकिर…..
हाय रे हमार पागल परान
घाम में जर के राख भइल
राह निहारत लाश भइल……
आ अब ………
एह फसल खातिर
का सावन ….. का भादो ?
जेठ के दुपहरिया में
खटत बा ……….
……… एह उमेद पर
कि एक दिन सावन आई
त मन के धरती हरियरा जाई ।
बाकिर…..
हाय रे हमार पागल परान
घाम में जर के राख भइल
राह निहारत लाश भइल……
आ अब ………
एह फसल खातिर
का सावन ….. का भादो ?
October 21, 2008 at 3:09 pm |
wah……ji aap ta bahut badhiya kavita likh tani….maza aa gaieel………pahli baar ham bhojpuri me kavita dhekhni ha………….
aapko bahut bahut mubark baad
- sunil maurya (Staff correspondent)
- nav bharat times
- noida