एक ओर
कुकुरमुत्ता नियर फइलल
भकचोन्हर गीतकारन के बिआइल
कैसेट में
लंगटे होके नाचत बिया
भोजपुरिया संस्कृति।
(……जइसे उ कवनो
कोठावाली के बेटी होखे……भा
कवनो गटर में फेंकल मजबूर
लइकी के नाजायज औलाद ।)
दुसरा ओर,
लोकरागिनी के किताब में कैद भइल
भोजपुरिया संस्कृति के दुलहिन के
चाटत बा दीमक ,सूंघत बा तेलचट्टा
आ काटत बा मूस।
आ एह दू नू का बीचे
भोजपुरी के भ्रम में हिन्दी के सड़ल
खिचड़ी चीखत आ
भोजपुरिये के जरल भात खात
मोंछ पर ताव देत
‘मस्त-मस्त ‘ करत
खाड़ बा , भोजपुरिया जवान
September 1, 2008 at 5:02 am |
bedhiya likh rahe ho bhaia. tumahri kavitaon se bhojpuri seekh loonga. aur brijbhasha me likhne ki predna mil rahi hai.
September 25, 2008 at 7:51 pm |
का करबंअ भोजपुरिया लोगन क ई कमी है। आ कहलो जाला की ‘देसी कउआ मराठी बोल।’ जहां ई लोग जाला ऊहां क चमक-दमक देखिके चौंधिया जाला। आपन भासा तक बोलले में शरम करे लगलंअ। पंजाबी, बंगाली, मराठी केहू आपन माई बोली बोलले में नाहीं लजाला लेकिन भोजपूरी भाई लोग समझअ लंअ की ‘तेरे को- मेरे को’ बोलले से हम बड़हन मनई हो जाईब। लेकिन पहिले मनई बनले क कोसिस करे के परी अउर ओके खातिर पहिले अपने महतारी के इज्जत करे के सीखे के परी। जौने बोली में माई कहे के सिखलीं ओके बोलले में कवन लाजि।
त जब बोललहि में लजालंअ त सेवा अ खोज-खबर कहां से लीहंअ। रहल बात नंगई के त ऊ त सब पइसा के चक्कर में लोग करत बाटं अउर भोजपुरी आ इहां के संस्कृति के साथे बहुत बड़ा मजाक करत हवं। दूसर लोग हंसा ला कि अइसने होला का भोजपुरी इलाका में।
December 1, 2008 at 4:32 am |
Dusra ke dekh ke gaiyawe wala hi ego pakaa bihari ke pahichan baa bhale apna kuch kare ke aukat hokhe chaee naa hokhee….pahile aapna susanskrit geet ke samaj main sucsess ker ke dekhawaa phir phir dusra ke gaiyawaa….. “Jay Bhojpuri jay Bhaukal”