जिनिगी के राह

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4 Responses to जिनिगी के राह

  1. rishindra kumar कहते हैं:

    har koi aapn jingi jiyat ba
    aapan jingi ke rash piyat ba
    je jaisan chahe ji sakela
    aapan jindgi ke rash pi sakela
    har koi aapna tarika se jingi jiye ke azad ba
    aapan jingi ke khud hi fariyad ba
    jekara se puchhi
    u
    aapan jingi ke sajawe me
    paresan ba
    koi safalta ke sath ba
    t
    koi ke jingi banawe me
    jingia barbad ba

    Name Rishindra KUmar
    C/o Kumar Printers
    Lah Bazar, Shilpi Pokhara
    Chapra-841301, Saran
    Bihar
    Mob. – 9852167840

  2. सुजीत कुमार सिंह(शिक्षक)कन्या मध्य विद्यालय अपहर,सारण कहते हैं:

    गाँव भइल पावन भावन धरती के
    प्यास बुझा गइले,
    घनघोर घटा झम झम पानी सबके
    जियरा हरसा गइले।
    पथराईल अँखिया में गजबे चमक के
    रेखा झलकता,
    खेतिहर के हियरा जुराईल खुशी के
    आँसू छलकता।
    गाछ बिरिछ जिव लागे जइसे फेरु
    जीवन पा गइले,
    घनघोर घटा झम झम पानी सबके
    जियरा हरसा गइले।

  3. सुजीत कुमार सिंह(शिक्षक)कन्या मध्य विद्यालय अपहर,सारण कहते हैं:

    काहे खातिर मुह माई मैडम से लगावतारे,
    बोले के ना लूर तोरा हमके सिखाव तारे।
    उ त बेचारी कुछो बोले नाही जानत बानी,
    माथवा पर चढ़ तारे जेतने गुदानत बानी।
    तोरा का बुझाई घर कइसे चलावल जाला,
    बुझेले ना बात तोके कतनो सिखावल जाला।
    हमनी के बिचवा में जहर फइलावतारे,
    बोले के ना लूर तोरा हमके सिखाव तारे।
    हंसल बोलल हमरा से तोरा सोहात नइखे,
    रोइ के सफाई देत बारे का बुझात नइखे?
    बेटवा के बात सुनी माई के करेजा फाटे,
    मउगी के छोर बेटा माईए के खाली डांटे।
    बेटवा कहेला हमरा मउगी के सतावतारे,
    बोले के ना लूर तोरा हमके सिखावतरे।

  4. सुजीत कुमार सिंह(शिक्षक)कन्या मध्य विद्यालय अपहर,सारण कहते हैं:

    एक साल हो गया गाँव छोर के गाया था,
    मानता हूँ हमरा खातिर शहर पूरा नाया था।
    हिन्दी ना आता था भोजपुरीए बोलाता था,
    किसी से बात करने में बहुते शरमाता था।
    एके साल में भूल गया भाषा आउर गाँव को,
    माई के आंचरा आ बाबूजी के पांव को।
    बाबूजी के पापा अब कह के बोलता हूँ,
    अंग्रेजी में ममी नाही कहने में डेराता हूँ।
    गंउआ के लोग अब तनिको ना भाता है,
    का जानी भोजपुरी में काथी बतियाता है।
    खेतवा बधार हमको कुछो ना चिन्हाया था,
    मानता हूँ हमरा खातिर शहर पूरा नाया था।
    अंग्रेजी को माने हम घोर के हूँ पि गया,
    गंउआ में मर जाता शहर जाके जी गया।
    गोरी गोरी चाम वाली उहंवा भेटाती है,
    हाय हलो करे नाही किसी से लजाती है।
    गंउआ में हमरा से तेज कोई बेटा नही,
    हमरा से बात बतिआले कोई भेंटा नही।
    बुझे मेरा बात हम जेतना भी कह गया,
    बचपन से इंहवा बेकारे हम रह गया।
    जिनगी के बिस साल गाँव में बिताया था,
    मानता हूँ हमरा खातिर शहर पूरा नाया था।

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